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श्लोक 1.14.168  |
দুঃখ-রস হৈবেক জানি’ আপ্ত-গণ
লক্ষ্মীর বিজয কেহ না করে কথন |
दुःख-रस हैबेक जानि’ आप्त-गण
लक्ष्मीर विजय केह ना करे कथन |
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| अनुवाद |
| यह जानते हुए कि भगवान् दुःखी होंगे, उनके सम्बन्धियों ने उन्हें लक्ष्मी के लुप्त होने के विषय में नहीं बताया। |
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| Knowing that the Lord would be sad, his relatives did not tell him about Lakshmi's disappearance. |
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