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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव
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श्लोक 168
श्लोक
1.14.168
দুঃখ-রস হৈবেক জানি’ আপ্ত-গণ
লক্ষ্মীর বিজয কেহ না করে কথন
दुःख-रस हैबेक जानि’ आप्त-गण
लक्ष्मीर विजय केह ना करे कथन
अनुवाद
यह जानते हुए कि भगवान् दुःखी होंगे, उनके सम्बन्धियों ने उन्हें लक्ष्मी के लुप्त होने के विषय में नहीं बताया।
Knowing that the Lord would be sad, his relatives did not tell him about Lakshmi's disappearance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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