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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव
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श्लोक 164
श्लोक
1.14.164
সন্তোষে বৈকুণ্ঠ-নাথ ভোজন করিযা
বিষ্ণু-গৃহ-দ্বারে প্রভু বসিলা আসিযা
सन्तोषे वैकुण्ठ-नाथ भोजन करिया
विष्णु-गृह-द्वारे प्रभु वसिला आसिया
अनुवाद
वैकुण्ठ के भगवान ने तृप्तिपूर्वक भोजन करने के बाद, वे मंदिर कक्ष के द्वार पर जाकर बैठ गए।
After the Lord of Vaikuntha had eaten his food to his satisfaction, he went and sat down at the door of the temple room.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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