श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.14.16-17 
ঘরে কিছু নাই, আই চিন্তে মনে-মনে
’কুডি সন্ন্যাসীর ভিক্ষা হৈবে কেমনে?’
চিন্তিতেই হেন, নাহি জানি কোন্ জনে
সকল সম্ভার আনি’ দেয সেই-ক্ষণে
घरे किछु नाइ, आइ चिन्ते मने-मने
’कुडि सन्न्यासीर भिक्षा हैबे केमने?’
चिन्तितेइ हेन, नाहि जानि कोन् जने
सकल सम्भार आनि’ देय सेइ-क्षणे
 
 
अनुवाद
घर पर कुछ भी न होने के कारण माता शची ने सोचा, “मैं बीस संन्यासियों के लिए भोजन कैसे बनाऊँगी?” जैसे ही उन्होंने ऐसा सोचा, कोई आया और बिना बताए आवश्यक सामग्री लाकर दे गया।
 
With nothing at home, Mother Shachi thought, “How will I prepare food for twenty monks?” As she thought this, someone came and brought the necessary ingredients without warning.
तात्पर्य
भोजन के लिये पर्याप्त सामग्री के अभाव और प्रभु के घर में संचित धन के कारण, शचीदेवी को सन्यासियों को खिलाने के लिए सामग्री की आवश्यकता महसूस हुई। प्रभु की इच्छा से, सभी आवश्यक सामग्री तुरंत वहाँ प्रकट हुई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)