श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  1.14.153 
বিদায-সমযে প্রভুর চরণে ধরিযা
সুস্বপ্ন-বৃত্তান্ত কহে গোপনে বসিযা
विदाय-समये प्रभुर चरणे धरिया
सुस्वप्न-वृत्तान्त कहे गोपने वसिया
 
 
अनुवाद
प्रस्थान के समय उसने भगवान के चरण पकड़ लिये और गुप्त रूप से स्वप्न की घटना बतायी।
 
At the time of departure, he held the feet of the Lord and secretly narrated the incident of his dream.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)