श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.14.15 
সেই-ক্ষণে কহি’ পাঠাযেন জননীরে
কুডি সন্ন্যাসীর ভিক্ষা ঝাট করিবারে
सेइ-क्षणे कहि’ पाठायेन जननीरे
कुडि सन्न्यासीर भिक्षा झाट करिबारे
 
 
अनुवाद
वे तुरन्त ही किसी को भेजकर अपनी माता को सूचित करते कि वे शीघ्र ही बीस संन्यासियों के लिए दोपहर के भोजन का प्रबंध करें।
 
He would immediately send someone to inform his mother to arrange lunch for the twenty monks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)