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श्लोक 1.14.15  |
সেই-ক্ষণে কহি’ পাঠাযেন জননীরে
কুডি সন্ন্যাসীর ভিক্ষা ঝাট করিবারে |
सेइ-क्षणे कहि’ पाठायेन जननीरे
कुडि सन्न्यासीर भिक्षा झाट करिबारे |
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| अनुवाद |
| वे तुरन्त ही किसी को भेजकर अपनी माता को सूचित करते कि वे शीघ्र ही बीस संन्यासियों के लिए दोपहर के भोजन का प्रबंध करें। |
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| He would immediately send someone to inform his mother to arrange lunch for the twenty monks. |
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