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श्लोक 1.14.148  |
প্রভুর শ্রী-মুখে শিক্ষা শুনি’ বিপ্রবর
পুনঃ পুনঃ প্রণম করযে বহুতর |
प्रभुर श्री-मुखे शिक्षा शुनि’ विप्रवर
पुनः पुनः प्रणम करये बहुतर |
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| अनुवाद |
| भगवान के मुख से यह उपदेश सुनकर ब्राह्मणश्रेष्ठ तपन मिश्र ने भगवान को बारम्बार नमस्कार किया। |
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| Hearing this sermon from the mouth of the Lord, the great Brahmin Tapan Mishra bowed to the Lord again and again. |
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