श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  1.14.148 
প্রভুর শ্রী-মুখে শিক্ষা শুনি’ বিপ্রবর
পুনঃ পুনঃ প্রণম করযে বহুতর
प्रभुर श्री-मुखे शिक्षा शुनि’ विप्रवर
पुनः पुनः प्रणम करये बहुतर
 
 
अनुवाद
भगवान के मुख से यह उपदेश सुनकर ब्राह्मणश्रेष्ठ तपन मिश्र ने भगवान को बारम्बार नमस्कार किया।
 
Hearing this sermon from the mouth of the Lord, the great Brahmin Tapan Mishra bowed to the Lord again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)