vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव
»
श्लोक 148
श्लोक
1.14.148
প্রভুর শ্রী-মুখে শিক্ষা শুনি’ বিপ্রবর
পুনঃ পুনঃ প্রণম করযে বহুতর
प्रभुर श्री-मुखे शिक्षा शुनि’ विप्रवर
पुनः पुनः प्रणम करये बहुतर
अनुवाद
भगवान के मुख से यह उपदेश सुनकर ब्राह्मणश्रेष्ठ तपन मिश्र ने भगवान को बारम्बार नमस्कार किया।
Hearing this sermon from the mouth of the Lord, the great Brahmin Tapan Mishra bowed to the Lord again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×