“इसलिए अपने घर वापस जाओ और सभी कपट त्याग कर, पूर्ण ध्यान से भगवान कृष्ण की पूजा करो।
“So go back to your home and, abandoning all hypocrisy, worship Lord Krishna with full concentration.
तात्पर्य
"हे तपना मिश्रा, गृहस्थ रहकर कृष्ण की सेवा करें।" उपसर्ग 'कु' वर्जित क्रियाओं का बोधक है और 'ना' प्रत्यय का अर्थ भी यही है। कुटीनाति का अर्थ है छल प्रवृत्ति, अर्थात धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जैसे चार भोग्य पदार्थों की साधना को जीवन के लक्ष्य मानने की जंलगत अभिलाषा को छोड़कर कृष्ण के पवित्र नामों में अनन्य आश्रय ग्रहण करने से कृष्ण में प्रेम जाग्रत हो सकता है। भोगी, कर्मी, योगी और मानसी साधक लोग कृष्ण प्रेम की प्राप्ति की चेष्टा नहीं करते; वे अपनी क्षणभंगुर इन्द्रियों को तृप्त करने में ही लगे रहते हैं। पर ऐसी क्रियाओं से उन्हें कोई शाश्वत लाभ नहीं होता। यदि ऐसे तुच्छ इच्छा-विकार हृदय में प्रधान रहेंगे तो कृष्ण कृष्ण नाम की रसास्वादन नहीं जागेगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥