অতএব কলি-যুগে নাম-যজ্ঞ সার
আর কোন ধর্ম কৈলে নাহি হয পার
अतएव कलि-युगे नाम-यज्ञ सार
आर कोन धर्म कैले नाहि हय पार
अनुवाद
"इसलिए कलियुग में सभी धार्मिक सिद्धांतों का सार भगवान के पवित्र नामों का जप ही है। किसी अन्य धार्मिक सिद्धांत का पालन करने से मुक्ति नहीं मिल सकती।
"Therefore, in Kaliyuga, the essence of all religious principles is chanting the holy names of the Lord. Liberation cannot be attained by following any other religious principle.
तात्पर्य
जीवन के लक्ष्य को पाने के चारों युगों में अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। कलि-युग के साधना का वर्णन करते हुए, कृष्ण के पवित्र नामों का कीर्तन करके यज्ञ करने के बारे में बताया गया है। इसलिए जीव मंदिर पूजा, यज्ञ अनुष्ठान या ध्यान से अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। मूर्ख लोग कृष्ण के नामों का कीर्तन त्याग देते हैं और व्यक्तिगत निष्काम गतिविधियों या मानसिक अटकलों का सहारा लेते हैं, जो अवैयक्तिक ब्राह्मण का अनुसरण करने का रूप है। ऐसी गतिविधियों से वे न तो स्वर्ग प्राप्त करके अपनी इंद्रियों को संतुष्ट कर सकते हैं और न ही भौतिक बंधन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥