श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  1.14.137 
কলি-যুগ-ধর্ম হয নাম-সঙ্কীর্তন
চারি যুগে চারি ধর্ম জীবের কারণ
कलि-युग-धर्म हय नाम-सङ्कीर्तन
चारि युगे चारि धर्म जीवेर कारण
 
 
अनुवाद
"कलियुग का युग-धर्म भगवान के पवित्र नामों का सामूहिक जप है। चारों युगों के चार धार्मिक सिद्धांत बद्धजीवों के उद्धार के लिए हैं।"
 
"The Yuga-dharma of Kaliyuga is the congregational chanting of the holy names of the Lord. The four religious principles of the four yugas are for the salvation of the conditioned souls."
तात्पर्य
कैसे भगवान, कलियुग के बड़े दोषों को नष्ट करते हैं? परीक्षित के इस प्रश्न के उत्तर में शुकदेव ने कलियुग के बड़े दोषों के बीच के एक बड़े गुण को इस प्रकार वर्णित किया है: [अगला पद]
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)