परित्राणाय साधूनाꣳ विनाशाय च दुष्कृताम्
धर्म-सꣳस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे
अनुवाद
'धर्मात्माओं का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म के सिद्धांतों की पुनः स्थापना करने के लिए मैं स्वयं युग-युग में प्रकट होता हूँ।'
'I Myself appear in every age to save the righteous, destroy the wicked and re-establish the principles of Dharma.'
तात्पर्य
आदि-खण्ड, अध्याय २, श्लोक १८ देखिए। वसुदेव द्वारा भेजे जाने पर यादवों के कुल-पुरोहित महर्षि गर्ग वृज स्थित नंद महाराज के घर आए। नंद द्वारा विधिपूर्वक पूजे जाने पर उन्होंने अपनी इच्छा और नंद महाराज की प्रार्थना को पूर्ण करने के लिए बलराम और कृष्ण, दोनों द्विजों की नामकरण संस्कृति करके उन्हें गुप्त रूप से शुद्ध किया। उनके महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने पहले बलराम नाम के अर्थ को समझाया और तब कृष्ण नाम के अर्थ को इस प्रकार समझायाः
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥