श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  1.14.134 
চারি-যুগে চারি-ধর্ম রাখি’ ক্ষিতি-তলে
স্বধর্ম স্থাপিযা-প্রভু নিজ-স্থানে চলে
चारि-युगे चारि-धर्म राखि’ क्षिति-तले
स्वधर्म स्थापिया-प्रभु निज-स्थाने चले
 
 
अनुवाद
“वह चार अलग-अलग युगों में चार अलग-अलग धार्मिक सिद्धांतों की स्थापना करने के लिए अवतार लेते हैं, और उसके बाद वह अपने धाम लौट जाते हैं।
 
“He incarnates in four different ages to establish four different religious principles, and then he returns to his abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)