श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  1.14.132 
প্রভু বলে,—“বিপ্র! তোমার ভাগ্যের কি কথা
কৃষ্ণ-ভজিবারে চাহ, সেই সে সর্বথা
प्रभु बले,—“विप्र! तोमार भाग्येर कि कथा
कृष्ण-भजिबारे चाह, सेइ से सर्वथा
 
 
अनुवाद
भगवान ने उत्तर दिया, "हे ब्राह्मण, तुम्हारे सौभाग्य के बारे में क्या कहा जा सकता है? चूँकि तुम कृष्ण की पूजा करना चाहते हो, इसलिए यह पर्याप्त है।
 
The Lord replied, “O Brahmin, what can be said about your good fortune? Since you want to worship Krishna, that is enough.
तात्पर्य
कई जन्मों से संचित ढेर सारे पवित्र कार्यों के कारण कृष्ण जी की सेवा करने की प्रवृत्ति जागृत होती है। यह सभी प्रकार से जीवों के जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। सभी प्रकार से शब्द का अर्थ है 'सब तरह से'। इस शब्द के लिए एक और पाठ सरवदा है, जिसका अर्थ है 'जो सभी वांछित पूर्णता प्रदान करता है'।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)