श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  1.14.131 
বিষযাদি-সুখ মোর চিত্তে নাহি ভায
কিসে জুডাইবে প্রাণ, কহ দযা-ময
विषयादि-सुख मोर चित्ते नाहि भाय
किसे जुडाइबे प्राण, कह दया-मय
 
 
अनुवाद
"मुझे भौतिक इन्द्रिय भोग में कोई सुख नहीं मिलता, इसलिए हे दयालु प्रभु, कृपया मुझे बताइये कि मैं कैसे राहत पा सकता हूँ।"
 
"I find no happiness in material sense enjoyment, so O merciful Lord, please tell me how I can find relief."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)