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श्लोक 1.14.13  |
নিরবধি অতিথি আইসে প্রভু-ঘরে
যা’র যেন যোগ্য, প্রভু দেন সবাকারে |
निरवधि अतिथि आइसे प्रभु-घरे
या’र येन योग्य, प्रभु देन सबाकारे |
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| अनुवाद |
| प्रभु के घर प्रतिदिन मेहमान आते थे, और प्रभु उनमें से प्रत्येक को सदैव संतुष्ट करते थे। |
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| Guests came to the Lord's house every day, and the Lord always satisfied each one of them. |
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