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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव
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श्लोक 121
श्लोक
1.14.121
“শুন, শুন, ওহে দ্বিজ পরম-সুধীর!
চিন্তা না করিহ আর, মন কর’ স্থির
“शुन, शुन, ओहे द्विज परम-सुधीर!
चिन्ता ना करिह आर, मन कर’ स्थिर
अनुवाद
हे संयमी ब्राह्मण, कृपया सुनो। अपना मन स्थिर करो और चिंता मत करो।
O self-controlled brahmin, please listen. Calm your mind and do not worry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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