श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.14.12 
দুঃখীরে দেখিলে প্রভু বড দযা করি’
অন্ন, বস্ত্র, কডি-পাতি দেন গৌরহরি
दुःखीरे देखिले प्रभु बड दया करि’
अन्न, वस्त्र, कडि-पाति देन गौरहरि
 
 
अनुवाद
जब भी गौरहरि किसी गरीब व्यक्ति से मिलते तो वे दयावश उसे तुरंत चावल, कपड़ा और पैसा दे देते थे।
 
Whenever Gaurahari met a poor person, he would immediately give him rice, clothes and money out of compassion.
तात्पर्य
ब्राह्मण स्वभाव में उदारता का भाव पाया जाता है, जबकि क्षुद्रता का भाव गैर-ब्राह्मणों के स्वभाव में पाया जाता है। एक आदर्श गृहस्थ के लीलाओं को प्रस्तुत करने के लिए, निमाई ने गरीबों और संकटग्रस्त लोगों को चावल, कपड़ा और धन का दान दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)