श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  1.14.102 
একেশ্বর সর্ব-রাত্রি করেন ক্রন্দন
চিত্তে স্বাস্থ্য লক্ষ্মী না পাযেন কোন ক্ষণ
एकेश्वर सर्व-रात्रि करेन क्रन्दन
चित्ते स्वास्थ्य लक्ष्मी ना पायेन कोन क्षण
 
 
अनुवाद
वह रातें अकेले, लगातार रोते हुए बिताती। उसके दिल को एक पल के लिए भी राहत नहीं मिलती थी।
 
She spent her nights alone, crying incessantly. Her heart never found a moment's relief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)