श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.13.95 
তুমি বা দিযাছ কোন্ অভিপ্রায করি’
বোল দেখি?” কহিলেন গৌরাঙ্গ শ্রী-হরি
तुमि वा दियाछ कोन् अभिप्राय करि’
बोल देखि?” कहिलेन गौराङ्ग श्री-हरि
 
 
अनुवाद
भगवान गौरांग ने पूछा, "लेकिन कृपया हमें बताएं कि इन आभूषणों का आपका आशय क्या था?"
 
Lord Gauranga asked, “But please tell us what you meant by these ornaments?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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