| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना » श्लोक 82 |
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| | | | श्लोक 1.13.82  | জিহ্বায আপনি সরস্বতী-অধিষ্ঠান
যে বোলযে, সে-ই হয অত্যন্ত-প্রমাণ | जिह्वाय आपनि सरस्वती-अधिष्ठान
ये बोलये, से-इ हय अत्यन्त-प्रमाण | | | | | | अनुवाद | | चूँकि दिग्विजयी की जिह्वा पर साक्षात् सरस्वती विराजमान थीं, अतः वे जो कुछ भी बोलते थे, वह प्रामाणिक होता था। | | | | Since Goddess Saraswati was present on Digvijayi's tongue, whatever he said was authentic. | |
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