श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 13: डिगविजयी को पराजित करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.13.47 
বুঝ দেখি, কা’র গর্ব চূর্ণ নাহি হয?
সর্বথা ঈশ্বর অহঙ্কার নাহি সয
बुझ देखि, का’र गर्व चूर्ण नाहि हय?
सर्वथा ईश्वर अहङ्कार नाहि सय
 
 
अनुवाद
"सोचो, किसका अभिमान नहीं चूर हुआ? परमेश्वर किसी का मिथ्या अहंकार कभी सहन नहीं करता।
 
"Think about it, whose pride hasn't been crushed? God never tolerates anyone's arrogance.
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