श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.12.8 
মনে ভাবে মুকুন্দ,—“আজি জিনিমু কেমনে?
ইহান অভ্যাস সব মাত্র ব্যাকরণে
मने भावे मुकुन्द,—“आजि जिनिमु केमने?
इहान अभ्यास सब मात्र व्याकरणे
 
 
अनुवाद
मुकुंद ने सोचा, "आज मैं उसे कैसे हराऊँगा? वह तो केवल व्याकरण में पारंगत है।"
 
Mukunda thought, "How will I defeat him today? He is only proficient in grammar."
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