| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण » श्लोक 45 |
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| | | | श्लोक 1.12.45  | অন্তর্যামী প্রভু,—চিত্ত জানেন সবার
শ্রীবাসাদি দেখিলেই করে’ নমস্কার | अन्तर्यामी प्रभु,—चित्त जानेन सबार
श्रीवासादि देखिलेइ करे’ नमस्कार | | | | | | अनुवाद | | परमात्मा के रूप में भगवान् सभी जीवों के हृदय को जानते हैं। जब भी वे श्रीवास जैसे भक्तों को देखते, तो उन्हें प्रणाम करते। | | | | As the Supreme Soul, the Lord knows the hearts of all living beings. Whenever He sees devotees like Srivasa, He bows to them. | |
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