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श्लोक 1.12.211  |
শ্রীধর বোলেন,—“ওহে পণ্ডিত-নিমাঞি!
গঙ্গা করিযাও কি তোমার ভয নাই? |
श्रीधर बोलेन,—“ओहे पण्डित-निमाञि!
गङ्गा करियाओ कि तोमार भय नाइ? |
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| अनुवाद |
| श्रीधर ने उत्तर दिया, "निमाई पंडित! क्या आप इस प्रकार गंगा का अपमान करने से नहीं डरते?" |
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| Sridhar replied, "Nimai Pandit! Are you not afraid of insulting Ganga in this way?" |
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