श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  1.12.211 
শ্রীধর বোলেন,—“ওহে পণ্ডিত-নিমাঞি!
গঙ্গা করিযাও কি তোমার ভয নাই?
श्रीधर बोलेन,—“ओहे पण्डित-निमाञि!
गङ्गा करियाओ कि तोमार भय नाइ?
 
 
अनुवाद
श्रीधर ने उत्तर दिया, "निमाई पंडित! क्या आप इस प्रकार गंगा का अपमान करने से नहीं डरते?"
 
Sridhar replied, "Nimai Pandit! Are you not afraid of insulting Ganga in this way?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd