श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  1.12.129 
সর্ব-ভূত-হৃদযে আকর্ষে সর্ব-মন
সে রূপ দেখিযা মুগ্ধ নহে কোন্ জন?
सर्व-भूत-हृदये आकर्षे सर्व-मन
से रूप देखिया मुग्ध नहे कोन् जन?
 
 
अनुवाद
भगवान् सभी जीवों के परमात्मा हैं, इसलिए वे सबके मन को आकर्षित करते हैं। उनके सुंदर रूप को देखकर कौन आकर्षित नहीं होता?
 
The Lord is the Supreme Being of all beings, and therefore He attracts everyone's mind. Who is not attracted by His beautiful form?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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