| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 12: भगवान का नवद्वीप में भ्रमण » श्लोक 125 |
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| | | | श्लोक 1.12.125  | বণিক্ বোলযে,—“তুমি জান, মহাশয!
তোমা’ স্থানে মূল্য কি নিতে যুক্ত হয? | वणिक् बोलये,—“तुमि जान, महाशय!
तोमा’ स्थाने मूल्य कि निते युक्त हय? | | | | | | अनुवाद | | व्यापारी ने उत्तर दिया, "आप जानते हैं, मेरे प्रिय महोदय! क्या मुझे आपसे पैसे लेना उचित है?" | | | | The merchant replied, "You know, my dear sir! Is it right for me to take money from you?" | |
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