श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  1.11.39-40 
দেখি’ প্রভু জিজ্ঞাসেন গোবিন্দের স্থানে
“এ বেটা আমারে দেখি’ পলাইল’ কেনে?”
গোবিন্দ বোলেন,—“আমি না জানি, পণ্ডিত!
আর কোন-কার্যে বা চলিল কোন্-ভিত”
देखि’ प्रभु जिज्ञासेन गोविन्देर स्थाने
“ए बेटा आमारे देखि’ पलाइल’ केने?”
गोविन्द बोलेन,—“आमि ना जानि, पण्डित!
आर कोन-कार्ये वा चलिल कोन्-भित”
 
 
अनुवाद
यह देखकर भगवान ने गोविंद से पूछा, "यह बालक मुझे देखकर क्यों भाग गया?" गोविंद ने उत्तर दिया, "हे पंडित, मुझे नहीं पता। शायद वह किसी काम से कहीं चला गया होगा।"
 
Seeing this, the Lord asked Govinda, "Why did this boy run away after seeing me?" Govinda replied, "O Pandit, I don't know. Perhaps he went somewhere on some errand."
तात्पर्य
इस श्लोक में जिस गोविंद को कहा गया है, वह लोहार गोविंद नहीं; वह उस समय भगवान का साथी, सेवक और द्वारपाल था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)