श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.11.27 
এই-মত উঠেয পরমানন্দ-সুখ
না জানে বৈষ্ণব সব আর কোন দুঃখ
एइ-मत उठेय परमानन्द-सुख
ना जाने वैष्णव सब आर कोन दुःख
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैष्णवों को महान आनंद मिला और वे सभी प्रकार के कष्ट भूल गये।
 
Thus the Vaishnavas attained great joy and forgot all kinds of sufferings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)