যত প্রেম মাধবেন্দ্র-পুরীর শরীরে
সন্তোষে দিলেন সব ঈশ্বর-পুরীরে
পাইযা গুরুর প্রেম কৃষ্ণের প্রসাদে
ভ্রমেন ঈশ্বর-পুরী অতি নির্বিরোধে
यत प्रेम माधवेन्द्र-पुरीर शरीरे
सन्तोषे दिलेन सब ईश्वर-पुरीरे
पाइया गुरुर प्रेम कृष्णेर प्रसादे
भ्रमेन ईश्वर-पुरी अति निर्विरोधे
अनुवाद
श्रीमाधवेन्द्र पुरी ने प्रसन्नतापूर्वक अपने परमानंद प्रेम का सम्पूर्ण भण्डार श्रीईश्वर पुरी को प्रदान कर दिया। कृष्ण की कृपा से श्रीईश्वर पुरी को अपने गुरु से भगवत्प्रेम प्राप्त हुआ, अतः वे समस्त चिंताओं से मुक्त होकर यात्रा करते रहे।
Sri Madhavendra Puri happily offered his entire storehouse of blissful love to Sri Ishvara Puri. By Krishna's grace, Sri Ishvara Puri received divine love from his guru and continued his journey, free from all worries.
तात्पर्य
श्री ईश्वर पुरीपाद के अपने गुरुदेव श्री माधवेंद्र पुरीपाद की सेवा करने के आदरपूर्ण और निश्छल भाव का वर्णन तथा उनकी कृपा की प्राप्ति के बारे में चैतन्य-चरितामृत (अंत्य 8.26-30) में पाया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥