श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 11: श्री ईश्वर पुरी से मिलन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  1.11.103 
হাসিযা বোলেন,—“তুমি পরম-পণ্ডিত
আমি পুঙ্থি করিযাছি কৃষ্ণের চরিত
हासिया बोलेन,—“तुमि परम-पण्डित
आमि पुङ्थि करियाछि कृष्णेर चरित
 
 
अनुवाद
ईश्वर पुरी मुस्कुराए और बोले, "आप बड़े विद्वान हैं। मैंने भगवान कृष्ण के गुणों पर एक पुस्तक लिखी है।"
 
Ishwar Puri smiled and said, "You are a great scholar. I have written a book on the qualities of Lord Krishna."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)