श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.10.95 
তবে লক্ষ্মী প্রদক্ষিণ করি’ সপ্ত-বার
যোড-হস্তে রহিলেন করি’ নমস্কার
तबे लक्ष्मी प्रदक्षिण करि’ सप्त-बार
योड-हस्ते रहिलेन करि’ नमस्कार
 
 
अनुवाद
फिर लक्ष्मी को निमाई के सात चक्कर लगवाए गए। जब ​​उन्हें निमाई के सामने रखा गया, तो निमाई ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया।
 
Lakshmi was then taken around Nimai seven times. When she was placed before him, Nimai folded his hands and bowed to her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)