श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  1.10.91 
প্রভু আসিলেহ মাত্র, মিশ্র গোষ্ঠী-সনে
আনন্দ-সাগরে মগ্ন হৈলা সবে মনে
प्रभु आसिलेह मात्र, मिश्र गोष्ठी-सने
आनन्द-सागरे मग्न हैला सबे मने
 
 
अनुवाद
भगवान के आते ही वल्लभाचार्य और उनके सहयोगी आनंद के सागर में डूब गए।
 
As soon as the Lord arrived, Vallabhacharya and his associates were immersed in an ocean of joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)