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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 86
श्लोक
1.10.86
কত বা মিলিল আসি’ পতি-ব্রতা-গণ
কতেক বা ইষ্ট মিত্র ব্রাহ্মণ সজ্জন
कत वा मिलिल आसि’ पति-व्रता-गण
कतेक वा इष्ट मित्र ब्राह्मण सज्जन
अनुवाद
अनेक सतीत्वपूर्ण स्त्रियाँ, शुभचिंतक, मित्र और आदरणीय ब्राह्मण इस समारोह में उपस्थित थे।
Many chaste women, well-wishers, friends and respectable Brahmins were present at the ceremony.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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