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श्लोक 1.10.85  |
নৃত্য-গীত-বাদ্যে মহা উঠিল মঙ্গল
চতুর্-দিকে ’লেহ-দেহ’ শুনি কোলাহল |
नृत्य-गीत-वाद्ये महा उठिल मङ्गल
चतुर्-दिके ’लेह-देह’ शुनि कोलाहल |
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| अनुवाद |
| गायन, नृत्य और वाद्य यंत्रों की मंगलमय ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थीं। हर तरफ़ उत्साहित लोग चिल्ला रहे थे, "यह लो! वह दो!" |
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| The auspicious sounds of singing, dancing, and musical instruments filled the air. Excited crowds everywhere shouted, "Take this! Give that!" |
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