श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.10.85 
নৃত্য-গীত-বাদ্যে মহা উঠিল মঙ্গল
চতুর্-দিকে ’লেহ-দেহ’ শুনি কোলাহল
नृत्य-गीत-वाद्ये महा उठिल मङ्गल
चतुर्-दिके ’लेह-देह’ शुनि कोलाहल
 
 
अनुवाद
गायन, नृत्य और वाद्य यंत्रों की मंगलमय ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थीं। हर तरफ़ उत्साहित लोग चिल्ला रहे थे, "यह लो! वह दो!"
 
The auspicious sounds of singing, dancing, and musical instruments filled the air. Excited crowds everywhere shouted, "Take this! Give that!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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