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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 84
श्लोक
1.10.84
প্রভাতে উঠিযা প্রভু করি’ স্নান-দান
পিতৃ-গণে পূজিলেন করিযা সমান
प्रभाते उठिया प्रभु करि’ स्नान-दान
पितृ-गणे पूजिलेन करिया समान
अनुवाद
अगली सुबह उठने के बाद निमाई ने स्नान किया, दान दिया और अपने पूर्वजों का आदरपूर्वक पूजन किया।
After waking up the next morning, Nimai took a bath, gave alms and respectfully worshipped his ancestors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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