श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.10.80 
চতুর্-দিকে দ্বিজ-গণ করে বেদ-ধ্বনি
মধ্যে চন্দ্র-সম বসিলেন দ্বিজ-মণি
चतुर्-दिके द्विज-गण करे वेद-ध्वनि
मध्ये चन्द्र-सम वसिलेन द्विज-मणि
 
 
अनुवाद
चारों ओर ब्राह्मण वैदिक मंत्रों का पाठ कर रहे थे और द्विज रत्न निमाई उनके बीच में चन्द्रमा के समान प्रकट हो रहे थे।
 
All around, Brahmins were reciting Vedic mantras and the twice-born Ratna Nimai was appearing among them like the moon.
तात्पर्य
गृहसूत्रों द्वारा बताए अनुष्ठानिक समारोहों और पवित्र क्रियाओं को करते हुए वेदिक मंत्रों का पाठ किया जाता है। विवाह या उद्धव एक चालीस आठ, सोलह या दस संस्कारों में से एक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)