श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.10.8 
আসিযা বৈসেন গঙ্গাদাসের সভায
পক্ষ-প্রতিপক্ষ প্রভু করেন সদায
आसिया वैसेन गङ्गादासेर सभाय
पक्ष-प्रतिपक्ष प्रभु करेन सदाय
 
 
अनुवाद
भगवान गंगादास की कक्षा में बैठते और लगातार शास्त्रार्थ में संलग्न रहते।
 
Bhagwan would sit in Ganga Das's class and would constantly engage in debates.
तात्पर्य
शब्द पक्ष एक विषय के दो अलग-अलग अर्थों को संदर्भित करता है। एक पक्षी अपने दो पंखों की सहायता से आकाश में उड़ने में सक्षम होता है; इसी प्रकार, जब किसी विषय वस्तु के बारे में कोई संदेह होता है, तो निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों की आवश्यकता होती है—पूर्व-पक्ष या चुनौती देने वाला पक्ष और पर-पक्ष या निष्कर्ष निकालने वाला पक्ष। पर-पक्ष के अनुरूप होने की निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष को पर-पक्ष या विरोधी पक्ष के रूप में संदर्भित करता है; या दूसरे शब्दों में, निष्पक्ष दृष्टिकोण से, प्रत्येक पक्ष स्व-पक्ष या स्वयं का पक्ष है, और आंशिक दृष्टिकोण से, प्रत्येक पक्ष एक विरोधी पक्ष है। शब्द पक्ष-प्रतिपक्ष डिबेट और काउंटर डिबेट, अनुकूल और प्रतिकूल प्रश्न और उत्तर, स्वयं के पक्ष और विरोधी पक्ष या चुनौती देने वाले पक्ष और निष्कर्ष निकालने वाले पक्ष को संदर्भित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)