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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 6
श्लोक
1.10.6
হেন-মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌরসুন্দর
রাত্রি-দিন বিদ্যা-রসে নাহি অবসর
हेन-मते नवद्वीपे श्री-गौरसुन्दर
रात्रि-दिन विद्या-रसे नाहि अवसर
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुन्दर नवद्वीप में निवास करते हुए दिन-रात अध्ययन में लगे रहे।
Thus, Sri Gaursundar, while residing in Navadvipa, remained engaged in studies day and night.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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