আইরে বোলেন তবে বনমালী আচার্য
“পুত্র-বিবাহের কেনে না চিন্তহ কার্য?
आइरे बोलेन तबे वनमाली आचार्य
“पुत्र-विवाहेर केने ना चिन्तह कार्य?
अनुवाद
वनमाली आचार्य ने तब शची से पूछा, "आप अपने पुत्र के विवाह के बारे में क्यों नहीं सोच रहे हैं?"
Vanmali Acharya then asked Shachi, "Why are you not thinking about your son's marriage?"
तात्पर्य
गौर-गणोद्देश-दीपिका (49) में वनामली घटाक का वर्णन इस प्रकार किया गया है: "वह वही घटाक श्री विश्वामित्र हैं जिन्होंने श्री रामचंद्र के विवाह की व्यवस्था की थी और रुक्मिणी द्वारा केशव को भेजे गए ब्राह्मण दूत के रूप में प्रकट हुए थे, अब वे वनामली आचार्य के रूप में प्रकट हुए हैं।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥