श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.10.53 
নমস্কারি’ আইরে বসিলা দ্বিজ-বর
আসন দিলেন আই করিযা আদর
नमस्कारि’ आइरे वसिला द्विज-वर
आसन दिलेन आइ करिया आदर
 
 
अनुवाद
उस पूज्य ब्राह्मण ने माता शची को प्रणाम किया और माता ने आदरपूर्वक उन्हें आसन दिया।
 
That revered Brahmin bowed to Mother Shachi and the Mother respectfully offered him a seat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)