श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.10.50 
নিজ-লক্ষ্মী চিনিযা হাসিলা গৌরচন্দ্র
লক্ষ্মী ও বন্দিলা মনে প্রভু-পদ-দ্বন্দ্ব
निज-लक्ष्मी चिनिया हासिला गौरचन्द्र
लक्ष्मी ओ वन्दिला मने प्रभु-पद-द्वन्द्व
 
 
अनुवाद
जब गौरचन्द्र ने अपनी प्रिय लक्ष्मी को पहचाना तो वे मुस्कुराये और लक्ष्मी ने मन ही मन भगवान के चरणकमलों को प्रणाम किया।
 
When Gaurachandra recognized his beloved Lakshmi, he smiled, and Lakshmi mentally bowed to the Lord's feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)