সেই নবদ্বীপে বৈসে এক সুব্রাহ্মণ
বল্লভ-আচার্য নাম—জনকের সম
सेइ नवद्वीपे वैसे एक सुब्राह्मण
वल्लभ-आचार्य नाम—जनकेर सम
अनुवाद
नवद्वीप में वल्लभाचार्य नामक एक योग्य ब्राह्मण थे, जो जनक महाराज के समान थे।
In Navadvipa there was a worthy brahmana named Vallabhacharya, who was like Janaka Maharaja.
तात्पर्य
गौरा गणोद्देश दीपिका में (४४) यह कथन है: "मिथिला के महान राजा जनक अब वल्लभाचार्य बनकर प्रकट हुए हैं। उन्हें, रुक्मिणी के पिता भीष्मक के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। श्री जानकी, रुक्मिणी और लक्ष्मी तीनों ही उनकी बेटियाँ थीं।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥