श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.10.37 
গঙ্গা-স্নান করিযা চলিলা প্রভু ঘরে
এই-মত বিদ্যা-রসে ঈশ্বর বিহরে
गङ्गा-स्नान करिया चलिला प्रभु घरे
एइ-मत विद्या-रसे ईश्वर विहरे
 
 
अनुवाद
स्नान करके भगवान घर चले गए। इस प्रकार भगवान ने विद्यार्थी जीवन का आनंद लिया।
 
After bathing, the Lord returned home. Thus, the Lord enjoyed his student life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)