जय जय जगन्नाथ-पुत्र विप्र-राज
जय हौ तो’र यत श्री-भक्त-समाज
अनुवाद
जगन्नाथ के पुत्र, ब्राह्मणों के राजा की जय हो। आपके सभी भक्तों की जय हो।
Victory to the son of Jagannatha, the king of the Brahmins. Victory to all your devotees.
तात्पर्य
श्री भक्त-समाज के विशेषण की व्याख्या नीचे दी गई है: व्रजेंद्र-नंदन श्री कृष्ण एकमात्र उपास्य हैं। वह परम भगवान दो रूपों में हैं, विषय और आश्रय, (उपास्य और उपासक) अपने सभी अधीनस्थों के उपास्य हैं। विषय-विग्रह, या पूजा की वस्तु, जो भाग्य की देवी के भगवान हैं, और आश्रय-विग्रह, या पूजा का स्थान, जो भाग्य की देवी हैं, दोनों ही अपने भक्तों की सेवा के पात्र हैं। भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक अपने उपास्य की सेवा को भक्ति या भक्तिपूर्ण सेवा कहा जाता है। विषय और आश्रय के सेवक भक्त कहलाते हैं। वे बहुत हैं, इसलिए सामूहिक रूप से उन्हें भक्त-समाज कहा जाता है। छह ऐश्वर्य की श्रेणियों के तहत, इस भक्त-समाज में विभिन्न आध्यात्मिक वैभव हैं। यही कारण है कि भक्तों को श्री-भक्त-समाज कहा गया है। जो सभी भक्त शक्तिशाली भगवान की शक्ति की शरण में हैं, वे अपने उपास्य भगवान को विभिन्न तरीकों से खुश करने की कोशिश करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥