श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.10.27 
বিনা জিজ্ঞাসিযা বোল,—’কি জানিস্ তুই’
ঠাকুর ব্রাহ্মণ তুমি, কি বলিব মুঞি!”
विना जिज्ञासिया बोल,—’कि जानिस् तुइ’
ठाकुर ब्राह्मण तुमि, कि बलिब मुञि!”
 
 
अनुवाद
"आपने मुझसे पूछा नहीं, फिर भी आप कहते हैं कि मुझे कुछ नहीं पता। आप तो एक पूजनीय ब्राह्मण हैं, तो मैं क्या कहूँ?"
 
"You didn't ask me, yet you say I don't know anything. You are a revered Brahmin, so what can I say?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)