श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.10.19 
শুনযে মুরারি-গুপ্ত আটোপ-টঙ্কার
না বোলযে কিছু, কার্য করে আপনার
शुनये मुरारि-गुप्त आटोप-टङ्कार
ना बोलये किछु, कार्य करे आपनार
 
 
अनुवाद
निमाई का उत्तेजक कथन सुनकर मुरारी गुप्त कुछ नहीं बोले, बल्कि अपना काम करते रहे।
 
Hearing Nimai's provocative statement, Murari Gupta did not say anything, but continued doing his work.
तात्पर्य
आटोप-टंकार वाक्‍य का अर्थ इस प्रकार समझाया गया है: आ उपसर्ग (किसी से मिथ्या अहंकार या परेशानी पैदा करने के अर्थ में) टुप् के साथ जुड़ता है, जिसका अर्थ है "फूला हुआ होना", "गर्व करना", "क्रोधित होना" या "बहुत अहंकारी होना"; और टाँकार शब्द का अर्थ है "धनुष की डोरी की आवाज", "कवच का बजना" या "हैरान होना"। इसलिए आटोप-टाँकार का अर्थ है "तीर जैसे शब्दों से भेदने से पहले अहंकारी शब्दों को गर्व या शेखी के साथ बोलना"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)