श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  1.10.129 
ঈশ্বরে সে আপনারে না জানাযে যবে
লক্ষ্মী ও জানিতে শক্তি না ধরেন তবে
ईश्वरे से आपनारे ना जानाये यबे
लक्ष्मी ओ जानिते शक्ति ना धरेन तबे
 
 
अनुवाद
जब तक भगवान स्वयं हमें स्वयं को जानने की अनुमति नहीं देते, तब तक लक्ष्मी में भी उन्हें समझने की शक्ति नहीं होती।
 
Unless God Himself allows us to know Himself, even Lakshmi does not have the power to understand Him.
तात्पर्य
भगवान की सर्वोच्च इच्छा से, उनके छिपे हुए खेल उनकी आंतरिक क्षमताओं की भी धारणा से परे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)