श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  1.10.127 
এই-রূপ নানা-মত কথা আই কয
ব্যক্ত হৈযা ও প্রভু ব্যক্ত নাহি হয
एइ-रूप नाना-मत कथा आइ कय
व्यक्त हैया ओ प्रभु व्यक्त नाहि हय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार माता शची के मन में अनेक विचार आए, क्योंकि भगवान् लगभग स्वयं प्रकट हो गए थे, किन्तु पूर्णतः नहीं।
 
Thus many thoughts came to the mind of Mother Shachi, because the Lord had almost revealed Himself, but not completely.
तात्पर्य
परम प्रभु भले ही इस संसार में प्रकट हुए, पर अपनी मधुर इच्छा से उन्होंने अपने छिपे हुए क्रीड़ाओं को सभी पर प्रकट नहीं किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)