श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  1.10.122 
কখন পুত্রের পাশে দেখে অগ্নি-শিখা
উলটিযা চাহিতে, না পায আর দেখা
कखन पुत्रेर पाशे देखे अग्नि-शिखा
उलटिया चाहिते, ना पाय आर देखा
 
 
अनुवाद
कभी-कभी शची को अपने बेटे के बगल में आग की लपटें दिखाई देती थीं, लेकिन जब वह दोबारा देखती तो वे गायब हो जाती थीं।
 
Sometimes Shachi would see flames next to her son, but when she looked again they would disappear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)