निखिलास्व अपि अवस्थासु जीवन्-मुक्तः स उच्यते
" जो व्यक्ति अपने शरीर, मन, बुद्धि और वाणी से कृष्ण की सेवा में कार्य करता है वह भौतिक जगत् में रहकर भी मुक्त व्यक्ति है, भले ही वह अनेक स्पष्ट रूप से भौतिक गतिविधियों में व्यस्त रहे।" सर्वोच्च भगवान विष्णु माया के परात्पर नियंत्रक हैं, इसलिए उन्हें भौतिक या किसी साधारण जीव की तरह मानना महा अपराध है। जब सर्वोच्च भगवान विष्णु के प्रति एक परात्पर सेवा का भाव जागृत होता है, तब भगवान की सेवा करने के लिए प्रवृत्त हुए मुक्त भक्त अब भौतिक बंधन में उलझे नहीं रहते। दूसरे शब्दों में, यदि एक जीव अपने को सर्वोच्च भगवान को प्रसन्न करने के लिए उत्सुक करता है, तो वह भौतिक अस्तित्व के बंधन से मुक्त हो जाता है, जो भगवान से अलग है और कभी भी व्यक्तिगत रूप से इंद्रिय सुख या भौतिक आनंद का प्रयास नहीं करता।
