श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  1.10.118 
দ্বিজ-আদি যত জাতি নট বাজনিযা
সবারে তুষিলা ধন, বস্ত্র, বাক্য দিযা
द्विज-आदि यत जाति नट बाजनिया
सबारे तुषिला धन, वस्त्र, वाक्य दिया
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् माता शची ने ब्राह्मणों, वादकों और नर्तकों को धन, वस्त्र और मधुर वचनों से संतुष्ट किया।
 
After that, Mother Shachi satisfied the Brahmins, musicians and dancers with money, clothes and sweet words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)